महावीर विश्वविद्यालय, मेरठ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार को महात्मा गांधी के जीवन, संघर्ष, देशसेवा, सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, सामाजिक समरसता तथा मानव कल्याण से जुड़े जीवन-मूल्यों से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ महात्मा गांधी जी के चित्र के अनावरण एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। इस अवसर पर गांधी जी के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान, देशसेवा तथा उनके जीवन-मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन, सेवा-भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गांधीवादी विचारों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

गांधी जयंती के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में महात्मा गांधी के जीवन, संघर्ष, सत्याग्रह, अहिंसा, स्वदेशी, स्वावलंबन तथा राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, अभिव्यक्ति-कौशल तथा सामाजिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया गया।

इस अवसर पर समता, सामाजिक समरसता, मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को समाज में समानता, आपसी सम्मान, भाईचारे तथा प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ समाज और सेवा-भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण, बालिका शिक्षा तथा दहेज-प्रथा की समाप्ति जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को बालिकाओं की शिक्षा, समान अवसरों तथा महिलाओं के सम्मान एवं अधिकारों के महत्व से अवगत कराया गया। दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता का संदेश देते हुए युवा पीढ़ी से सामाजिक परिवर्तन में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर महावीर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) सर्वोत्तम दीक्षित ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा, त्याग, सेवा और मानवता के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है। गांधी जी ने अपने विचारों और कर्मों के माध्यम से यह संदेश दिया कि समाज में स्थायी परिवर्तन केवल कानूनों से नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के आचरण और सामाजिक जिम्मेदारी से संभव है। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और अपने सामाजिक दायित्वों को समझने का अवसर भी है। विद्यार्थियों को गांधी जी के विचारों से प्रेरणा लेते हुए सत्य, अनुशासन, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और सेवा-भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

कुलपति महोदय ने कहा कि महावीर विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

महावीर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) सर्वोत्तम दीक्षित के मार्गदर्शन एवं कुलसचिव डॉ. सतीश राघव के समन्वय में आयोजित गांधी जयंती कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों की सक्रिय सहभागिता रही।

कार्यक्रम में आयुर्वेद संकाय, फार्मेसी संकाय, कृषि विज्ञान संकाय, पुस्तकालय विज्ञान संकाय, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय, कंप्यूटर अनुप्रयोग संकाय, अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय, विज्ञान संकाय, शिक्षा संकाय, कला एवं मानविकी संकाय, विधि अध्ययन संकाय, नर्सिंग संकाय तथा प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान संकाय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिवार की ओर से “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत”, सेवा-भावना, नशामुक्ति, सामाजिक समरसता एवं युवा सहभागिता का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रासंगिक हैं। विद्यार्थियों को उनके विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें अपने आचरण एवं सामाजिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, सेवा और सामाजिक समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया। समारोह का समापन गांधी जी के आदर्शों एवं उनके दिखाए मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ हुआ।